प्रस्तावना
बीसवीं सदी के आरंभिक इतिहासकारों ने सिंधु सभ्यता को आर्य-आक्रमण से विनष्ट बताया था। परंतु राखीगढ़ी के प्राचीन कंकाल अवशेषों के डीएनए अनुसंधान तथा उपग्रह चित्रों ने यह सिद्ध कर दिया है कि यह एक अखंड स्वदेशी ज्ञान-परंपरा की निरंतरता है।
पुरातात्विक व भूगर्भीय प्रमाण
धोलावीरा का अद्वितीय जल-प्रबंधन तंत्र और यज्ञ-वेदियों के पुरातात्विक प्रमाण वैदिक ग्रन्थों में वर्णित अनुष्ठानों से आश्चर्यजनक साम्य रखते हैं।