विषाद से समत्व की यात्रा
गीता का आरंभ 'विषाद योग' से होता है। अर्जुन की मनोदशा आज के कॉर्पोरेट और प्रतियोगी जीवन में ग्रस्त आधुनिक व्यक्ति की स्थिति से भिन्न नहीं है। भगवान श्रीकृष्ण निष्काम कर्मयोग द्वारा कर्म के बंधन से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
उद्धरण संदर्भ (Citation):
स्वामी आत्मानंद सरस्वती et al. (2025). "श्रीमद्भगवद्गीता और आधुनिक तनाव प्रबंधन: मनोवैज्ञानिकी अन्वेषण". अक्षय प्रकाशन (akshayprakashan.in).
स्वामी आत्मानंद सरस्वती et al. (2025). "श्रीमद्भगवद्गीता और आधुनिक तनाव प्रबंधन: मनोवैज्ञानिकी अन्वेषण". अक्षय प्रकाशन (akshayprakashan.in).